प्रभु प्रार्थना
De Simple Silence.
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[modifier] प्रभु प्रार्थना
हे परवरदिगार ! सबके राखनहार और सबकी रक्षा करने वाले !
तुम्हारा कोई आदि नहीं है, और न तुम्हारा कोई अन्त है ; तुम अद्वैत हो, तुम तुलना से परे हो, और तुम्हारा पार कोई नहीं पा सकता है ।
तुम्हारा कोई रंग और रूप नहीं है, तुम आविर्भाव से रहित हो, और तुम गुणातीत हो ।
तुम अपार हो और अगाध हो, कल्पना और धारणा से परे हो, शाश्वत और अनश्वर हो ।
तुम अखंड्य हो, और दिव्य नेत्रों के सिवाय और किसि भी प्रकार से तुम्हे कोई नहीं देख सकता है ।
तुम्हारा अस्तित्व सदैव था तुम सदैव रहते हो और तुम सदैव रहोगे ।
तुम सर्वत्र हो, तुम हर वस्तु में हो, और तुम हर जगह से परे तथा हर वस्तु से परे भी हो ।
तुम आकाश में और पाताल में हो ।
तुम व्यक्त हो और अव्यक्त हो, तुम सब लोकों पर हो और समस्त लोकों से परे हो ।
तुम तीनों भूवनों में हो और तीनें भूवनों से परे भी हो । तुम अगोचर हो और स्वतंत्र हो ।
तुम सृष्टि के रचने वाले हो, स्वामियों के स्वामी हो, समस्त मनों और हृदयों के ज्ञाता हो । तुम सर्वशक्तिमान हो और सर्वव्यापी हो ।
तुम अनन्त ज्ञान हो, अनन्त शक्ति हो और अनन्त आनन्द हो ।
तुम ज्ञान के महासागर हो, सर्वज्ञ, अनन्त ज्ञान रखने वाले हो । तुम भूत, वर्तमान, और भविष्य के ज्ञाता हो और तुम स्वयम् ज्ञान हो ।
तुम पूर्ण दयामय हो और सतत् परहितकारी हो ।
तुम आत्माओं की आत्मा हो, और अनन्त गुणों से सम्पन्न एक परमात्मा हो ।
तुम सत्य, ज्ञान और परमानन्द की त्रिमूर्ति हो ।
तुम सत्य के मूल हो, प्रेम के महासागर हो ।
तुम सनातन सत्ता हो, ऊँचों में सबसे ऊँचे हो । तुम प्रभु और परमेश्वर हो । तुम परब्रह्म हो, और परात्पर परब्रह्म भी हो । तुम परब्रह्म परमात्मा हो, अल्लाह हो, इलाही हो, यज़दान हो, अहूरमज़्द हो, और प्रीयतम ईश्वर हो ।
तुम्हारा नाम एज़द, अर्थात् एकमेव पूज्य है ।
