Universal Message/hi

De Simple Silence.

[modifier] विश्वव्यापी संदेश

मैं सिखलाने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए आया हूँ । इसलिए अच्छी तरह समझ लो कि मुझे कोई आचार-नियम निर्धारित नहीं करने हैं ।

सनातन काल से मैं सिद्धांत और आचार-नियम निर्धारित करता आया हूँ, लेकिन मनुष्य ने परवाह नहीं की । ईश्वर के उपदेशों के अनुसार चलने में मनुष्य की असमर्थता अवतार के उपदेशों को मज़ाक बना देती है । उसकी सिखलाई हुई दयाभावना व्यवहार में लाने के बजाय, मनुष्य उसके नाम पर लडाई-झगड़ा करता रहा है । उसके शब्दों से प्राप्त नम्रता, पवित्रता और सच्चाई को आचरण में लाने के बजाय मनुष्य ने वैर, लोभ-लालच और हिंसा का मार्ग अपनाया है ।

चूँकि पुरातन काल में ईश्वर के निर्धारित किए हुए सिद्धांतों और आचार-नियमों पर मनुष्य के ध्यान नहीं दिया इसलिए मैंने इस अवतारी स्वरूप में मौन धारण कर लिया है । तुमने उपदेशों की माँग की और तुम्हें यथेष्ट उपदेश दिए गए, लेकिन अब उनके अनुसार जीवन व्यतीत करने का समय आ गया है । ईश्वर के निकट और बिल्कुल निकट पहुँचने के लए तुम्हें "मैं", "मेरा" और "मुझको" से दूर और बिल्कुल दूर हटना होगा । तमुहें अपनी खुदी के अलावा और कुछ नहीं त्यागना है । यह बहुत ही सहज है, फिर भी यह प्रायः असंभव सिद्ध होता है । मेरी कृपा से ही तुम्हें अपनी सीमित खुदी को त्यागना संभव है । मैं उसी कृपा की धारा बहाने के लिए आया हूँ ।

मैं फिर से कहता हूँ कि मुझे इस बार कोई आचार-नियम निर्धारित नहीं करने हैं । जब मैं सत्य की धारा बहाउँगा, जिसको बहाने के लिए मैं आया हूँ, तब मनुष्यों के दैनिक जीवन खुद ही जीते-जागते उपदेश बन जाएँगे । जो शब्द मैंने मुख से नहीं निकाले वे उनमें जीवित होकर बोलेंगे ।

मैं अपने को मनुष्य से उसके खुद के अज्ञान के पर्दे में छिपाए रखता हूँ और बिरले लोगों को ही अपना तेज प्रकट करता हूँ । मेरा मौजूदा 'अवतारी स्वरूप' इस कालचक्र का अंतिम 'अवतार' हूँ, इसलिए मेरा प्रकटीकरण भारी से भारी होगा । जब मैं अपना मौन खोलूँगा तो मेरे प्रेम की तरंग ब्रह्मांड भर में व्याप्त होगी और सृष्टि का प्रत्येक जीवधारी उसे जानेगा, महसूस करेगा और ग्रहण करेगा । उससे ऐसी सहयता मिलेगी कि हर कोई खुद के बनाए बंधनों से अपने-अपने तरीक़े से छुटकारा पाने में समर्थ होगा । मैं बह दैवी प्रियतम हूँ जो तुम्हें इतना अधिक प्यार करता है जितना तुम खुद भी कभी अपनेआप से नहीं कर सकते । मेरा मौन खुलने से तुम्हें ऐसी सहायता कर सकोगे ।

सारे संसर में फैली यह सब गड़बड़ी और अंधव्यवस्था अटल थी और इसके लिए कोई दोषी नहीं है । जो होना था वह हुआ, और जो होना है वह होकर रहेगा । तुम्हारे बीच मेरे आने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता न था और न है । मुझे आना था, और मैं आ गया । मैं वहीं "पुरातन पुरुष" हूँ ।

-मेहेर बाबा

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