Ishtiyaaq-e-shauq/hi

De Simple Silence.

इश्तियाक़-ए-शौक़ जब हद से सिवा हो जाएगा

सामने आँखों के वह जलवा नुमा हो जाएगा

क्या कहूँ ऐ दिल खुदी खोकर तू क्या हो जाएगा

वस्ल-ए-हक़ होगा बंदे से खुदा

कान में आकर के वह कह गई मुझे परदा की बात

मैं तेरा हो जाऊँगा जब तू मेरा हो जाएगा


- मेहेर बाबा, नासिक, (1929 ?)

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